मुसाफ़िर हूँ यारों/ ना घर है ना ठिकाना,मुझे चलते जाना है,बस चलते जाना है!
सफर लिखा हाथ की लकीरों में
ना खोने दिया ख्वाबों को ताबीरों में
शहर की हवा ने मुझमें रंग भरे
मैं भोला सा पुरानी तस्वीर में
मुसाफ़िर हूँ यारों/ ना घर है ना ठिकाना,मुझे चलते जाना है,बस चलते जाना है!
सफर लिखा हाथ की लकीरों में
ना खोने दिया ख्वाबों को ताबीरों में
शहर की हवा ने मुझमें रंग भरे
मैं भोला सा पुरानी तस्वीर में